भारत - चीन में कहाँ - कहाँ तनाव 😱😱
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद
को तुरंत सुलझाने कि जरूरत है। भारत और चीन दुनिया कि सबसे लंबी विवादित सीमा साझा
करते है । दोनों के बीच जंग भी हो चुकी है और अक्सर झड़पे भी होती है । भारत और चीन के
सीमा विवाद कि कहानी .....
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद पर बात की अमेरिकी मैगजीन न्यूज़ वीक को इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दोनों देशों की तत्काल सीमा विवाद सुलझा लेना चाहिए उन्होंने कहा कि अपनी सीमाओं पर चल रही स्थिति को हमें तुरंत सुलझाने की जरूरत है ताकि दोनों देशों के बीच दीप चर्चा में मुश्किल स्थिति के पीछे छोड़ा जा सके
पीएम मोदी ने कहा स्थाई और शांतिपूर्ण रिश्ते ना सिर्फ दोनों मुल्कों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जरूरी है प्रधानमंत्री के इस बयान पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी प्रतिक्रिया दी है ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि अगर भारत पीएम मोदी के बयान पर अमल करता है तो चीन से सहमति जताता है तो दोनों देशों के संबंध सही दिशा उत्तेजित से होंगे ।
पीएम मोदी ने कहा स्थाई और शांतिपूर्ण रिश्ते ना सिर्फ दोनों मुल्कों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जरूरी है प्रधानमंत्री के इस बयान पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी प्रतिक्रिया दी है ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि अगर भारत पीएम मोदी के बयान पर अमल करता है तो चीन से सहमति जताता है तो दोनों देशों के संबंध सही दिशा उत्तेजित से होंगे ।
** दुनिया कि सबसे लंबी विवादित सीमा !! **
भारत और चीन दुनिया की सबसे लंबी लंबी विवादित सीमा साझा करते हैं भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी लंबी सीमा है जो तीन सेक्टर इस्टर्न मिडिल और वेस्टर्न में बैठी हुई है
इस्टर्न सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा चीन से लगती है जिसकी लंबाई 1346 किलोमीटर है मिडिल सेक्टर में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड है जो 545 किलोमीटर लंबी है वहीं वेस्टर्न सेक्टर में लद्दाख है जो चीन के साथ 1597 किलोमीटर लंबी सीमा सजा करता है
भारत और चीन के बीच करीब इलाकों को लेकर सीमा विवाद है लद्दाख का करीब 38000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन का कब्जा है जिससे अक्षय सिंह कहा जाता है इसके अलावा चीन अरुणाचल प्रदेश की 90000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर दावा करता है
इतना ही नहीं 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था इसके तहत पाकिस्तान ने पीओके की 5180 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को दे दी थी ।
इस्टर्न सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा चीन से लगती है जिसकी लंबाई 1346 किलोमीटर है मिडिल सेक्टर में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड है जो 545 किलोमीटर लंबी है वहीं वेस्टर्न सेक्टर में लद्दाख है जो चीन के साथ 1597 किलोमीटर लंबी सीमा सजा करता है
भारत और चीन के बीच करीब इलाकों को लेकर सीमा विवाद है लद्दाख का करीब 38000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन का कब्जा है जिससे अक्षय सिंह कहा जाता है इसके अलावा चीन अरुणाचल प्रदेश की 90000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर दावा करता है
इतना ही नहीं 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था इसके तहत पाकिस्तान ने पीओके की 5180 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को दे दी थी ।
** लद्दाख अक्साई चीन पर दावा **
1865 में ब्रिटिश सर्वर डब्ल्यू ओ ह जॉनसन भारत और तिब्बत के बीच एक सीमा रेखा खींची इसके बाद 1897 में एक और सीमा रेखा खींची गई इसमें अक्षय चीन को भारत कैसे दिखाया गया इस जॉनसन आदर्घ लाइन कहा जाता है । इससे पहले 1853 में एक नई बॉर्डर लाइन खींची गई इसे मयकतरनी मैकडॉनल्ड लाइन कहा जाता है।
इसमें आक्साई चीन का ज्यादातर हिस्सा चीनी क्षेत्र में दिखाया गया है।
1947 में भारत जब आजाद हुआ तो उसने जॉनसन आदर्घ लाइन को सीमा माना जबकि 1949 में चीन जब पीपल रिपब्लिक आफ चीन बना तो वह चाहता टू मेक ए टर्निंग मैकडॉनल्ड लाइन को सीमा मान सकता था।
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया चीन की इस हरकत की वजह से कंफ्यूजन बड़ा और अक्साई चीन में सीमा को डिमार्क टेड दिखाया गया ।
1962 में चीन ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर लड़ाई शुरू कर दी बाद में युद्ध विराम के तहत चिन्ह अरुणाचल से तो पीछे हट गया लेकिन अक्षय चीन पर कब्जा कर लिया अब तक अक्साई चीन पर चीन अवैध कब्जा है ।
इसमें आक्साई चीन का ज्यादातर हिस्सा चीनी क्षेत्र में दिखाया गया है।
1947 में भारत जब आजाद हुआ तो उसने जॉनसन आदर्घ लाइन को सीमा माना जबकि 1949 में चीन जब पीपल रिपब्लिक आफ चीन बना तो वह चाहता टू मेक ए टर्निंग मैकडॉनल्ड लाइन को सीमा मान सकता था।
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया चीन की इस हरकत की वजह से कंफ्यूजन बड़ा और अक्साई चीन में सीमा को डिमार्क टेड दिखाया गया ।
1962 में चीन ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर लड़ाई शुरू कर दी बाद में युद्ध विराम के तहत चिन्ह अरुणाचल से तो पीछे हट गया लेकिन अक्षय चीन पर कब्जा कर लिया अब तक अक्साई चीन पर चीन अवैध कब्जा है ।
** अरुणाचल प्रदेश 90000 किलोमीटर पर दावा **
चीन अरुणाचल प्रदेश की 90000 किलोमीटर जमीन पर दावा करता है अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी सीमा विवाद चीन की तरफ से ही है इस विवाद को समझने के लिए इतिहास में चलते हैं 1914 में शिमला में एक समझौता हुआ उसे समय ब्रिटिश इंडिया के विदेश सचिव हेनरी मैक मोहन थे । उन्होंने ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच 890 किलोमीटर लंबी सीमा खींची इसे ही मैक मोहन लाइन कहा जाता गया इसमें अरुणाचल प्रदेश को भारत कैसा बताया गया था।
आजादी के बाद भारत ने मैक मोहन लाइन को ही सीमा माना लेकिन 1950 में चीन में तिब्बत पर कब्जा कर लिया चीन ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का एक हिस्सा है और चुकी तिब्बत पर उसका कब्जा है इसीलिए अरुणाचल प्रदेश भी उसका हुआ।
चीन मैक मोहन लाइन को नहीं मानता और दावा करता है क्यों 1914 में जब ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के भी समझौता हुआ था तब वह वहां मौजूद नहीं था उसका कहना है कि चीन इसका हिस्सा रहा है। इसीलिए वह खुद से कोई फैसला नहींले सकता है।
** पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर भी है विवाद **
1962 की जंग के बाद 1970 में पूर्वी लद्दाख से लगी लीक से भारत ने अपनी सुना हटा ली थी इससे चीन सैनिकों की घुसपैठ भी बढ़ गई लिया जा जहां सीमाएं तय नहीं थी वहां पेट्रोलिंग पॉइंट बनाए गए जहां भारतीय सेवा अगस्त लगा सके 1976 में भारत को ला पर 65 पेट्रोलिंग बिंदु तय किए पेट्रोलियम पॉइंट से विवेक कराकोरम पास में है 65 कुमार में है इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स को आसानी से पहचाना जा सकता है लेकिन इन्हें चिन्हित नहीं किया गया।
पेट्रोलिंग पॉइंट्स से सीमा तय नहीं हुई है लेकिन यह विवादित इलाके हैं इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर दोनों देशों के सैनिक पेट्रोलियम करते हैं इसके लिए कुछ प्रोटोकॉल भी तय है कहा जाता है कि कभी-कभी दोनों देशों की सैनिक एक ही समय में पेट्रोलिंग के लिए आ जाते हैं ऐसे में प्रोटोकॉल यह है कि अगर एक पक्ष को दूसरे की पेट्रोलियम टीम दिख जाए तो वह वहीं रुकजाएगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति में कुछ बोला ना ना जाता है बल्कि बैनर दिखाया जाता है भारत के बैनर में लिखा जाता है आप भारत के इलाके में है वापस जाओ इसी तरह चीन के बैनर में लिखा जाता है आप चीन के इलाके में है वापस जाओ।
हल्के सालों में देखने आया कि ऐसी स्थिति दोनों देशों के सैनिक पीछे हटने के बजाय वापस में भिड़ जाते हैं यही वजह है कि लिक पर कई बार दोनों और और के सैनिकों के बीच झड़प और धक्का मुखी की खबरें आ रही है।
भारत के किन-किन हिस्सों पर चीन के साथ विवाद है
1. पैंगोग त्सो झील : यह झील 134 किलोमीटर लंबी है जो हिमालय में करीब 14000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है इस झील का 44 किलोमीटर क्षेत्र भारत और करीब 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में पड़ता है एलएसीवी इसी झील से गुजरती है इस वजह से वहां कन्फ्यूजन बना रहता है और दोनों देशों के बीच में विवाद है।2. गलवान घाटी (लद्दाख ) :
गलवान घाटी लद्दाख और अक्षय चीन के बीच स्थित है यहां पर ला ऑक्साइ चीन को भारत से अलग करती है यह घाटी चीन के दक्षिणी शिंजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली हुई है जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी ।
3. डोकलाम :
वैसे तो डोकलाम भूटान और चीन का विवाद है लेकिन यह सिक्किम सीमा के पास पड़ता है यह एक तरह से ट्राई जंक्शन है जहां से चीन भूटान और भारत नजदीक है भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है 2017 में करीब ढाई महीने तक डोकलाम पर भारत चीन के बीच तनाव था।
4. तवांग अरुणाचल प्रदेश :
अरुणाचल प्रदेश में पढ़ने वाले तवांग पर चीन की नजरे हमेशा से रही है तवांग पौधों का प्रमुख धर्म स्थल है इसे एशिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ भी कहा जाता है चीन तवांग को तिब्बत कैसा बता रहा है 1914 में जो समझौता हुआ था उसमें तवांग को अरुणाचल का हिस्सा बताया गया था 1962 की जंग में चीन के तवांग पर कब्जा कर लिया गया था लेकिन युद्ध विराम के तहत उसे अपना कब्जा छोड़ना पड़ा था।
5. नाथुला सिक्किम :
नाथुला हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है यह भारत के सिक्किम और दक्षिणी तिब्बत की चुंबी घाटी को जोड़ता है यह 14200 फीट की ऊंचाई पर है भारत के लिए इसलिए हम हैं क्योंकि यही से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थ यात्री गुजरते हैं नाथुला को लेकर भारत चीन में कोई विवाद नहीं है लेकिन यहां भी कभी भारत चीन की सीन में झड़पों की खबरें आती रहती है।
वैसे तो डोकलाम भूटान और चीन का विवाद है लेकिन यह सिक्किम सीमा के पास पड़ता है यह एक तरह से ट्राई जंक्शन है जहां से चीन भूटान और भारत नजदीक है भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है 2017 में करीब ढाई महीने तक डोकलाम पर भारत चीन के बीच तनाव था।
4. तवांग अरुणाचल प्रदेश :
अरुणाचल प्रदेश में पढ़ने वाले तवांग पर चीन की नजरे हमेशा से रही है तवांग पौधों का प्रमुख धर्म स्थल है इसे एशिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ भी कहा जाता है चीन तवांग को तिब्बत कैसा बता रहा है 1914 में जो समझौता हुआ था उसमें तवांग को अरुणाचल का हिस्सा बताया गया था 1962 की जंग में चीन के तवांग पर कब्जा कर लिया गया था लेकिन युद्ध विराम के तहत उसे अपना कब्जा छोड़ना पड़ा था।
5. नाथुला सिक्किम :
नाथुला हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है यह भारत के सिक्किम और दक्षिणी तिब्बत की चुंबी घाटी को जोड़ता है यह 14200 फीट की ऊंचाई पर है भारत के लिए इसलिए हम हैं क्योंकि यही से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थ यात्री गुजरते हैं नाथुला को लेकर भारत चीन में कोई विवाद नहीं है लेकिन यहां भी कभी भारत चीन की सीन में झड़पों की खबरें आती रहती है।
क्या राष्ट्रपति शासन लग सकती है दिल्ली में
LAC क्या है ?
भारत और चीन के बीच कभी भी कोई आधार आधिकारिक सीमा नहीं रही और इसकी वजह छीन है चीन किसी रेखा को सीमा नहीं मानता है 1962 की जंग में चीन की सेवा लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के तवांग तक में अंदर घुस आई थी बाद में जब युद्ध विराम हुआ तो क्या हुआ कि दोनों देशों की सीन जहां तैनात है उसे ही एल ए सी आणि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल माना जाएगा यह एक तरह से सीजी फायर रखा है ला जम्मू कश्मीर में भारत के इलाके और चीन के अवैध कब्जे वाली अक्षय चीन को अलग करती है ल ए सी लद्दाख कश्मीर उत्तराखंड हिमाचल सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है।आखिर चीन किसे मानता है सीमा
जब भी सीमा विवाद का जिक्र होता है तो चीन 7 नवंबर 1959 की तारीख को लिखे एक खत की बात उठने लगता है 7 नवंबर 1959 को चीन के तब के प्रधानमंत्री मऊ और लाई ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक खत लिखा था एक हाथ ऐसे समय लिखा गया था जब चीन सैनिक कई किलोमीटर तक भारतीय सीमा में घुस आई थी उसे खत में झाड़ू और लाई ने कहा था कि दोनों देश की सीन जहां है उसे ही एल ए सी माना जाए वहां पर शांति बनाए रखने के लिए 20 किलोमीटर दूरी पीछे हट जाए हालांकि एंड ए के इस प्रस्ताव को नेहरू ने खारिज कर दिया था।नीचे भी जरूर पढे !!! 👇👇👇👇



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